About the Society

Anahata Chakra Satsanga: The Society of the Heart Chakra

“The heart has reasons which reason knows not.” – Blaise Pascal

Vision

The anahata chakra balances the three higher and three lower chakras and also balances masculine and feminine energies.  As the center closest to the heart and lungs, it represents both intuitive wisdom and primal energy (prana).  By naming the Society after the chakra, we affirm that divinity resides in each heart as a part of the heart of the universe.  Each aspirant learns to see the transcendent within the mundane through meditation on this important vital center.

“Sat” means truth, and “sanga” means gathering or fellowship.  A satsanga is a holy gathering where individuals come together for worship of higher powers and discussion of philosophical and spiritual matters.

With the intention of satsanga in mind, the Heart Chakra Society envisions educational opportunities to transform each person’s place in the world and connection to others, in an effort to serve each other respectfully as a part of a global society.  We hope to explore the meaning of life and how each individual’s purposeful being can make the world a more just and compassionate place for all beings.

The East and the West are illusionary boundaries that need to blend sensitively together with respect to religious and secular contemplative traditions.  When the East and the West come together, there is an opportunity for contemplative practice that deepens our individual perspectives and allows us to acknowledge our interconnectedness with compassion.

Mission

The Heart Chakra Society aims to transform society by promoting contemplative practices of religious and secular traditions to create a compassionate educational environment that thinks critically about the interconnectedness of all beings, animate and inanimate, in an effort to contribute to a more just society and a sustainable future.  We view the Divine Mother and all of the devas as humanity’s great allies on the path to a more peaceful and just world.

 

anahata mandala

 

समाज के विषय में

अनाहत  चक्र सत्संग: हृद चक्र संस्था

“दिल के कारण जो कारण नहीं जानता है”- ब्लेस पास्कल

दृष्टिकोण

अनाहत  चक्र तीन उच्चतर और  तीन निम्नतर चक्रों का और पुस्र्ष और स्त्री शक्ति संतुलन रखता हे। हृदय और फेफड़ों के निकटतम केंद्र के रुप में, सहज ज्ञान और मौलिक ऊर्जा (प्राण) दोनों का प्रतिनिधित्व करता है। चक्र के ऊपर सत्संग का नामकरण करके, हम स्थापना करते हैं कि देवत्व ब्रह्मांड के दिल के एक भाग के रुप में हर दिल में रहता है। प्रत्येक आकांक्षी महत्वपूर्ण केन्द्र के ध्यान के माध्यम से इस संसार का उत्कृष्ट देखना सीखते हैं ।

‘सत्य’  का मतलब है सच्चाई, और ” “संग” का मतलब है सभा या साहचर्य । सत्संग एक पवित्र सभा है जहां व्यक्तियों उच्च शक्ति की पूजा के लिए और दार्शनिक आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा करने आते हैं।

मन में सत्संग के इरादे के साथ, हृद चक्र संस्था विश्व समाज के भाग के रूप में सम्मान से एक दुसरे की सेवा करने के प्रयास में, दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति  के एक दुसरे के  साथ संम्बध की जगह बदलने के लिए शैक्षिक की अवसर देता है। हम जीवन का अर्थ अनुसंधान करने का आशा करते है और कैसे प्रत्येक व्यक्ति के अर्थपूर्ण उपस्थिति से दुनिया को करुणामय जगह बनाने का उम्मीद करते है।

पूर्व और पश्चिम कि काल्पनिक सीमाओं के धार्मिक और धर्म निरपेक्ष परंपराओं के साथ संयोग करने की जरूरत हैं। जब पूर्व और पश्चिम करीब आते हैं तब मननशील अभ्यास के लिए एक अवसर होता है जो हमारे व्यक्तिगत दृष्टिकोण और गहरा करता है और करूणा के साथ  हमारी अंतर-संयुक्तता स्वीकार करने के हमें  अनुमति देता है और ध्येय अभ्यास के अवसर देता है।

विशेष कार्य

हृद चक्र संस्था परिवर्तन के लक्ष्य की ओर समाज के योगदान प्रयास में चेतन और निर्जीव सभी प्राणियों के अंतर-संयुक्तता कि एक करुणामय शैक्षिक माहौल बनाने के लिए धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष परंपराओं को बढ़ावा देकर समाज को बदलने के उद्देश्य और टिकाऊ भविष्य है। हम एक अधिक शांतिपूर्ण मानवता के पथ पर सहयोगी के रूप में देवी मां और सभी देवता को  देख सकते हैं।

Originally written by D. Dillard-Wright and S. MisirHirallal.  Rev. 7/7/15. Hindi Trans. by Maitrayi 8/17/15